CBD ऑयल: घर पर बनाएँ या टेस्टेड खरीदें?
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CBD ऑयल: घर पर बनाएँ या टेस्टेड खरीदें?

किचन वाले तरीके की असली कीमत क्या है, डोज़ क्यों असली मुश्किल है, और कब लैब-टेस्टेड बोतल पैसे वसूल है।

लेखक CosechaLibre संपादकीय टीमलॉट HI-10193 मिनट पढ़ने में

घर का बना CBD ऑयल बोतल पर सस्ता दिखता है, लेकिन उसमें असल में कितना CBD है यह आप कभी नहीं जान पाते: लैब टेस्ट के बिना डोज़ सिर्फ़ अंदाज़ा है। अगर आपको रोज़ एक जैसा असर चाहिए, तो टेस्टेड प्रोडक्ट लगभग हमेशा बेहतर है; घर का तरीका एक केमिस्ट्री एक्सपेरिमेंट ज़्यादा है, और हर बैच अलग निकलता है। पहले एक साफ़ बात: CBD और उसके कच्चे माल की कानूनी स्थिति हर देश और राज्य में बहुत अलग है, और भारत समेत कई जगहों पर गांजे के पौधे से जुड़ी हर चीज़ पर सख्त नियम हैं। यह लेख सिर्फ़ जानकारी है, कुछ करने की सलाह नहीं।

किचन में CBD ऑयल बनता कैसे है?

ताज़े पौधे में एक्टिव CBD लगभग नहीं होता, होता है उसका एसिड रूप CBDA। उसे CBD में बदलने के लिए पहले «डीकार्ब» करना पड़ता है: बारीक की हुई कलियों को ओवन में 110 से 120 °C पर 30 से 45 मिनट। तापमान ज़्यादा हुआ तो एक्टिव चीज़ें उड़ जाती हैं या टूट जाती हैं; कम हुआ तो बदलाव आधा ही होता है। डीकार्ब के बाद उस मटीरियल को MCT या ऑलिव ऑयल जैसे तेल में 60 से 70 °C पर कुछ घंटे रखा जाता है, फिर छाना जाता है। वजह सीधी है: कैनाबिनॉइड तेल में घुलते हैं।

असली हिसाब: घर का बनाम खरीदा हुआ

कागज़ पर घर का सस्ता है; असल में आप तीन बार चुकाते हैं: कच्चे माल के पैसे, बर्बाद हुई निकासी, और अनिश्चितता। घर के किचन में अक्सर CBD का एक हिस्सा ही निकल पाता है, कई बार आधा भी नहीं; बाकी पौधे के बचे हिस्से में रह जाता है या गर्मी में उड़ जाता है। अच्छे प्रोडक्ट आमतौर पर सुपरक्रिटिकल CO2 या एथेनॉल से निकाले जाते हैं, जो कहीं ज़्यादा असरदार है, और साथ आता है एनालिसिस सर्टिफ़िकेट (COA, certificate of analysis), जिसमें कैनाबिनॉइड मिलीग्राम तक लिखे होते हैं।

  • घर का: सामान पर कम खर्च, लेकिन कंसंट्रेशन एक पहेली और हर बैच अलग।
  • खरीदा हुआ: दाम ज़्यादा, लेकिन हर मिलीलीटर के मिलीग्राम तय और शुद्धता रिकॉर्ड में।
  • घर के तेल में ढेर सारी क्लोरोफ़िल, वैक्स और पौधे का कचरा होता है: स्वाद कड़वा और नापना मुश्किल।
  • एक ठीक-ठाक COA में सिर्फ़ CBD और THC नहीं, कीटनाशक, भारी धातु और सॉल्वेंट के बचे हिस्से के नतीजे भी होते हैं।

असली मुश्किल है डोज़

CBD के साथ सब कुछ डोज़ पर टिका है। आम तरीका है रोज़ 10 से 25 मिलीग्राम से शुरू करना और धीरे-धीरे बदलना। अगर आपको पता ही नहीं कि एक बूँद में 1 मिलीग्राम है या 5, तो यह तरीका चल ही नहीं सकता। बहुत से लोग जो घर पर तेल बनाते हैं, आख़िर में कहते हैं «CBD से मुझे कुछ नहीं हुआ», और वजह अक्सर यही होती है कि कंसंट्रेशन बहुत कम था या पता ही नहीं था। आपके लिए सही है या नहीं और कितना, यह डॉक्टर से बात करके तय करें, खासकर अगर आप कोई और दवा ले रहे हैं।

आप बोतल नहीं खरीद रहे, आप यह भरोसा खरीद रहे हैं कि रोज़ वही डोज़ मिलेगी।

CBD कहाँ कानूनी है?

इसका एक जवाब नहीं है। कुछ देशों में कम THC वाले CBD प्रोडक्ट दुकान पर मिल जाते हैं; कई जगहों पर CBD या उसका कच्चा माल सख्त नियमों में आता है, या नशीले पदार्थ की तरह देखा जाता है। भारत और उन कई जगहों पर जहाँ हिन्दी पाठक रहते हैं, गांजे के पौधे से जुड़े प्रोडक्ट पर कड़े नियम हैं और वे बदलते भी रहते हैं। सरहद पार CBD ले जाना भी गंभीर मुसीबत बन सकता है। अपने इलाके के ताज़ा सरकारी नियम ही मानें। यह लेख निकासी का सिद्धांत समझाता है, यह नहीं कहता कि आप अपने यहाँ खुद यह कर सकते हैं।

हमारी राय

अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहाँ कानून इजाज़त देता है, हाथ से काम करना पसंद है और क्वालिटी के उतार-चढ़ाव की परवाह नहीं, तो किचन वाला तरीका एक दिलचस्प एक्सपेरिमेंट है। लेकिन अगर आप भरोसेमंद असर चाहते हैं, नींद या दर्द के लिए, तो टेस्टेड प्रोडक्ट लगभग हमेशा जीतता है। पहले जानकारी, राय बाद में: भरोसे की बात हो, तो चुनाव साफ़ है।